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बवासीर का उपचार करने की 7 आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

✍ admin 📅 August 17, 2025

बवासीर क्या है? (Hemorrhoids का परिचय)

बवासीर, जिसे अंग्रेजी में Hemorrhoids कहते हैं, गुदा या मलाशय की नसों में सूजन और सूजन के कारण होता है। यह स्थिति दर्दनाक हो सकती है और व्यक्ति के जीवन को असुविधाजनक बना देती है। इसमें रोगी को खून आना, खुजली होना और बैठने में परेशानी जैसी समस्याएँ होती हैं।


बवासीर के प्रमुख लक्षण

  • गुदा में जलन और खुजली

  • मल त्याग के समय खून आना

  • दर्द और सूजन

  • गुदा के पास गाँठ का बनना

  • लंबे समय तक कब्ज रहना


बवासीर के कारण और जोखिम कारक

  • लंबे समय तक कब्ज या दस्त

  • मसालेदार और तैलीय भोजन का अधिक सेवन

  • शरीर में पित्त और वात दोष का बढ़ना

  • अधिक देर तक बैठना या खड़े रहना

  • गर्भावस्था के दौरान दबाव


आयुर्वेद में बवासीर का दृष्टिकोण

आयुर्वेद के अनुसार, बवासीर शरीर में वात और पित्त दोष के असंतुलन से उत्पन्न होता है। यह रोग अर्श कहलाता है और इसके कई प्रकार बताए गए हैं।

दोषों का असंतुलन और बवासीर

  • वातज अर्श – सूखी और कठोर गाँठ

  • पित्तज अर्श – जलन और खून आना

  • कफज अर्श – सूजन और भारीपन


बवासीर का उपचार करने की 7 आयुर्वेदिक दवाइयाँ

1. त्रिफला चूर्ण

त्रिफला चूर्ण कब्ज को दूर करने और आंतों को साफ करने के लिए सबसे प्रभावी उपाय है। यह मल को नरम बनाता है और बवासीर के दर्द व खून को कम करता है।

2. हरितकी

हरितकी को “औषधियों की माता” कहा जाता है। यह पाचन को दुरुस्त करती है और मल त्याग को आसान बनाती है।

3. नीम की छाल

नीम में एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। इसकी छाल का काढ़ा पीने से सूजन और संक्रमण कम होता है।

4. अरंडी का तेल

अरंडी का तेल एक प्राकृतिक रेचक है। यह मल को मुलायम बनाता है और गुदा में होने वाली सूजन को कम करता है।

5. नागकेसर

नागकेसर बवासीर में खून आना रोकने के लिए उत्तम दवा है। यह रक्त को शुद्ध करता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।

6. गंधक रसयान

यह आयुर्वेदिक दवा सूजन और दर्द को कम करती है। नियमित सेवन से बवासीर में राहत मिलती है।

7. पाइल्सिन टैबलेट (आयुर्वेदिक पेटेंट मेडिसिन)

यह एक आयुर्वेदिक संयोजन है, जिसमें कई जड़ी-बूटियाँ होती हैं। यह दर्द, खून और सूजन सभी को नियंत्रित करती है।


बवासीर के लिए घरेलू और जीवनशैली उपाय

सही आहार और परहेज़

  • हरी सब्जियाँ और फाइबर युक्त भोजन करें

  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएँ

  • मसालेदार और तैलीय भोजन से परहेज़ करें

योग और प्राणायाम

  • पवनमुक्तासन

  • वज्रासन

  • अनुलोम-विलोम प्राणायाम


बवासीर में किन चीजों से बचना चाहिए

  • शराब और धूम्रपान

  • ज्यादा देर तक बैठना

  • कठोर सतह पर बैठना

  • मिर्च-मसाले वाले भोजन


बवासीर के लिए आधुनिक बनाम आयुर्वेदिक उपचार

आधुनिक चिकित्सा में ऑपरेशन और एलोपैथिक दवाइयाँ होती हैं, जो जल्दी राहत देती हैं लेकिन साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं।
आयुर्वेदिक दवाइयाँ प्राकृतिक होती हैं और लंबे समय तक असर करती हैं, साथ ही रोग की जड़ को भी ठीक करती हैं।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या आयुर्वेदिक दवाइयाँ बवासीर को पूरी तरह ठीक कर सकती हैं?
👉 हाँ, नियमित सेवन और सही जीवनशैली अपनाने से बवासीर में काफी हद तक सुधार होता है।

Q2. बवासीर में कौन सा भोजन सबसे अच्छा है?
👉 फाइबर युक्त भोजन, हरी सब्जियाँ, और पर्याप्त पानी पीना सबसे अच्छा है।

Q3. क्या बवासीर में ऑपरेशन ही आखिरी विकल्प है?
👉 नहीं, शुरुआती अवस्था में आयुर्वेदिक दवाओं से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

Q4. क्या गर्भावस्था में आयुर्वेदिक दवाएँ ली जा सकती हैं?
👉 कुछ दवाएँ सुरक्षित हैं, लेकिन डॉक्टर या आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह लेना ज़रूरी है।

Q5. क्या योगासन बवासीर में मददगार है?
👉 जी हाँ, योगासन और प्राणायाम पाचन और रक्त संचार को बेहतर बनाते हैं।

Q6. बवासीर में तुरंत राहत के लिए कौन सी दवा है?
👉 त्रिफला चूर्ण और नागकेसर खून व कब्ज को नियंत्रित कर तुरंत आराम देते हैं।


निष्कर्ष: आयुर्वेद से बवासीर पर काबू

बवासीर एक गंभीर लेकिन नियंत्रित होने वाली समस्या है। अगर आप समय रहते सही आहार, योग और बवासीर का उपचार करने की 7 आयुर्वेदिक दवाइयाँ अपनाते हैं, तो यह रोग पूरी तरह से काबू में आ सकता है। आधुनिक इलाज त्वरित है, लेकिन आयुर्वेद सुरक्षित और स्थायी समाधान प्रदान करता है।

👉 आयुर्वेद अपनाएँ, स्वस्थ जीवन पाएँ।